मुख्या पृष्ट

Tuesday, April 5, 2016

अंगारों सा कुछ यूँ जल रहा हूँ,


अब कौन सी राह मैं चल रहा हूँl 


अपना पराया है कौन यहाँ अब,


किसके लिए मैं यूँ पल रहा हूँl @ - राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'