Wednesday, January 6, 2016

फौजी

कब तक सीना छलनी यूँ सरहद पर, 

करवाता रहेगा अपना फौजी।

चुप बैठें हैं घौर तपोवन में जैंसे,

चिपके हैं कुर्सी पर दीमक बन कैंसे,

क्यों न सरहद पर कुछ बूँद लहू की, 

अब तुम भी दे दो जी । 

कब तक सीना छलनी यूँ सरहद पर, 

करवाता रहेगा अपना फौजी। @ पँक्तियाँ सर्वाधिकार सुरक्षित, राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'

~~~ ढुंगा ~~~ ढुंगा उठ्यां भी छन  ढुंगा छुप्याँ भी छन  ढुंगा फर्कणा भी छन  ढुंगा सर्कणा भी छन क्या बोन यूँ ढुंगों कु ढुंगा ढ...